खाद सब्सिडी का बढ़ता बिल
- क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए उर्वरक सब्सिडी बजट से 14% अधिक होकर 1.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
- चालू वित्त वर्ष में भी वास्तविक खर्च 2 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए बजट में 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कितना पड़ा असर?
- अप्रैल 2026 में यूरिया की आयात कीमतें लगभग दोगुनी होकर 935 से 959 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई हैं।
- सल्फर की कीमतें 50% बढ़कर 630 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई हैं, जिससे जटिल खादों का खर्च बढ़ गया है।
- प्राकृतिक गैस की कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से मार्च 2026 में घरेलू यूरिया उत्पादन में 25% की गिरावट आई है।
आयात पर भारत की निर्भरता
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन इसकी निर्भरता काफी गहरी है:- सीधी निर्भरता: यूरिया (20%) और DAP (50%)
- प्रभावी निर्भरता: अगर कच्चे माल (LNG और रसायनों) को जोड़ लिया जाए, तो सप्लाई चेन की निर्भरता 68-70% तक पहुंच जाती है।
- खाड़ी क्षेत्र का महत्व: भारत अपनी जरूरत का 20 से 30% यूरिया, 30% DAP और 50% LNG खाड़ी देशों से आयात करता है।


