नई दिल्ली: देश में गुरुग्राम और मुंबई जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत दुबई से भी ज्यादा पहुंच चुकी है। लेकिन देश के कई छोटे शहरों में भी लग्जरी अपार्टमेंट्स की डिमांड में भारी तेजी आई है। सवाल उठता है कि आखिर देश में महंगे अपार्टमेंट्स की मांग क्यों बढ़ रही है और कौन इन्हें खरीद रहा है? इस तेजी के पीछे अमीरों, एनआरआई और नव-धनाढ्य लोगों का बड़ा हाथ है। महामारी के बाद लोगों की पसंद में भी एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। लोग अब केवल लोकेशन नहीं देख रहे हैं बल्कि स्पेस और प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।कई एलीट बायर्स के लिए लग्जरी हाउसिंग अब स्ट्रैटजिक वेल्थ अलॉकेशन का हिस्सा बन गई है। स्टार्टअप और टेक बूम ने देश में लग्जरी होमबायर्स की एक नई कैटगरी खड़ी कर दी है। बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में टेक एग्जीक्यूटिव्स और फाउंडर्स महंगी प्रॉपर्टीज का रुख कर रहे हैं। इसी तरह सीनियर कंसल्टेंट्स और कंपनियों में बड़े पदों पर काम करने वाले लोग प्रीमियम गेटेड कम्युनिटीज को प्रिफर कर रहे हैं। इस क्लास के लिए लग्जरी होम सक्सेस और लॉन्ग-टर्म एसेट बिल्डिंग का प्रतीक है।छोटे शहरों में बढ़ रही डिमांड
एनआरआई और एचएनआई डाइवर्सिफिकेशन और रिटर्न के लिए प्रीमियम रियल एस्टेट में निवेश कर रहे हैं। यह ग्लोबल इकॉनमी में उथलपुथल और अनिश्चितता के समय हेज का काम करता है। साथ ही मेट्रो मार्केट्स में इससे अच्छा-खासा किराया मिल जाता है। विदेशी निवेशकों के लिए भारत का लग्जरी रियल एस्टेट एक आर्कषक पोर्टफोलियो एंकर है।पंचकूला, इंदौर और कोयंबटूर जैसे शहरों में भी लग्जरी हाउसिंग की डिमांड बढ़ रही है। इस शहरों में मेट्रो के मुकाबले मकान सस्ते हैं और ग्रोथ की ज्यादा संभावना है। इन शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में लगातार सुधार हो रहा है। साथ ही लग्जरी बूम अब बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों की तरफ बढ़ रहा है। पिछले कुछ साल में कुछ चुनिंदा मार्केट्स में प्रॉपर्टी की कीमत दोगुनी या तिगुनी हो चुकी है।