तालिबान से जंग पर पाकिस्तान ने दोस्त चीन का नहीं किया लिहाज, दिया झटका, अब क्‍या करेंगे जिनपिंग के दूत?

Updated on 16-03-2026 03:26 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए चीन की मध्यस्थता स्वीकार करने या बातचीत की मेज पर आने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने चीन से कहा है कि वह अफगानिस्तान के तालिबान शासन के साथ बातचीत ना करने की नीति पर कायम रहेगा। पाक सरकार ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूहों को पनाह मिल रही है। ये गुट लगातार पाकिस्तान में आतंकी हमले कर रहे हैं। अफगानिस्तान इन गुटों को पनाह देने की नीति नहीं बदल रहा है तो पाकिस्तान भी बातचीत नहीं करेगा।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, इस्लामाबाद ने अपने करीबी सहयोगी बीजिंग की उस ताजा कूटनीतिक कोशिश को ठुकरा दिया है, जिसका मकसद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम करना था। पाकिस्तान की ओर से चीन को बार-बार दोस्त कहा गया है लेकिन अफगानिस्तान मुद्दे पर उसने दोस्त का लिहाज नहीं किया है। ये सब ऐसे समय हो रहा है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बीते कुछ हफ्ते से युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।

चीन को कह दिया नो थैंक्स

चीन की मध्यस्थता की कोशिशों से जुड़े घटनाक्रम को जानने वाले सूत्रों ने 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' को बताया कि पाकिस्तान ने संकट को सुलझाने के बींजिग की नेक कोशिशों की सराहना की। चीन की कोशिशों के लिए पाकिस्तान ने शुक्रिया कहा लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव हुए बिना काबुल के साथ सामान्य बातचीत फिर से शुरू करना मुमकिन नहीं है।पाकिस्तानी अधिकारियों ने चीनी पक्ष को बताया कि तालिबान सरकार के प्रति मौजूदा सख्त नीति अपनाने से पहले इस्लामाबाद ने कूटनीति की कोशिश की। पाकिस्तान ने तालिबान शासन ने TTP और दूसरी समूहों को पनाह नहीं देने की अपील की। इसके लिए द्विपक्षीय माध्यमों के साथ-साथ मित्र देशों के जरिए काबुल के सामने अपनी बात रखी गई लेकिन तलिबान शासन ने ध्यान नहीं दिया।

पाकिस्तान को तालिबान पर भरोसा नहीं

पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, तालिबान ने चीनी दूत के सामने अपनी पुरानी बात दोहराई कि TTP का मुद्दा पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और कहा कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं किया जा रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने काबुल के इस दावे को मानने से पूरी तरह से इनकार कर दिया।

पाकिस्तान ने बीजिंग को यह संदेश दिया कि जब तक काबुल इस्लामाबाद की चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक बातचीत की गुंजाइश बहुत कम है। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा है कि अफगानिस्तान में हालात जस के तस हैं। काबुल से भरोसा नहीं मिलने के चलते हम अपनी नीति पर कायम हैं।

चीन ने की थी बातचीत की अपील

चीन ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने के लिए हालिया समय में कोशिश की है। चीन ने अफगानिस्तान के लिए अपने विशेष दूत को काबुल और इस्लामाबाद भेजकर बातचीत की तरफ बढ़ने के लिए कहा था। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीते हफ्ते अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी से फोन पर बातचीत भी की थी।

वांग यी और मुत्तकी की बातचीत के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अफगानिस्तान के लिए उसका विशेष दूत मध्यस्थता की कोशिश में है। चीन उम्मीद करता है कि दोनों पक्ष शांत रहेंगे और जल्द से जल्द आमने-सामने बैठकर बातचीत करेंगे। बातचीत के जरिए अपने विवादों और मतभेदों को सुलझाएंगे तो पूरे क्षेत्र की शांति के लिए अच्छा होगा।

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